बुधवार, 29 अगस्त 2012
पेंटर
मैंने ऐसा जानबूझकर किया -
ये तीन कवितायें विचार हेतु प्रस्तुत हैं -
(ये कला के लिए हैं किसी तरह से अन्य भाओं को इनसे
सम्बद्ध नहीं किया जा सकता यदि कोई करता है तो वह मात्र मूढ़ ही होगा )
एक एहशास को समर्पित -
डॉ0 लाल रत्नाकर
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