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संवाद
सृजनशीलता कभी भोथरी नहीं होती
सुप्रसिद्ध चित्रकार लाल रत्नाकर से आलोक प्रकाश पुतुल की बातचीत
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कार्टूनिस्ट की गिरफ्तारी: 'ये कला विरोध की है, विद्रोह की नहीं..'
सुधीर तैलंग
कार्टूनिस्ट
सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 16:08 IST तक के समाचार
कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
जिस तरह से असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार किया गया है उससे लगता है कि इस सरकार का आम जनता के साथ, भारत के लोकतंत्र के साथ रिश्ता खत्म हो चुका गया है.
पिछले छह महीनों से मैं देख रहा हूं कि इस पागलपन में एक नियमितता है. पहले ममता बनर्जी एक प्रोफेसर को गिरफ्तार कराती हैं. उसके बाद 60 साल पुराने अंबेडकर कार्टून पर संसद में बवाल होता है. सभी राजनीतिक दल इसे हटाने के लिए इकट्ठे होते हैं...उस शंकर के खिलाफ जो कार्टूनिंग के पितामह थे, जिनका नेहरु जैसे लोग भी सम्मान करते थे.
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संसद के अंदर तो इनका 'सेंस ऑफ ह्युमर' खत्म हो चुका है. संसद के बाहर भी इन्हें यह मंज़ूर नहीं है.
साल 1975 में घोषित रूप से आपातकाल था. तब एक सेंसर बोर्ड होता था जो खबरों और कार्टूनों को सेंसर करता था.
अब सेंसरशिप और आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है. लेकिन यह अघोषित आपातकाल है जो और भी दुखद है, और भी खतरनाक है.
ये लोग भेड़िए की खाल में छिपे हुए खतरनाक लोग हैं. हर कार्टून की आवाज़ को चुप कराने की कोशिश करते हैं.
मैं इस वक्त जर्मनी में हूँ और मैं इस कार्य की तुलना हिटलर से करूंगा. मुझे इसका वर्णन करने के लिए इससे उचित शब्द नज़र नहीं आता.
बड़ी सोच
सुधीर तैलंग सालों से राजनीति, समाज और राजनीतिक पात्रों पर कार्टून बना रहे हैं
हमारे 65 साल के लोकतंत्र में बड़े बड़े कार्टून आए हैं. अपने 30 वर्ष में यह काम करते हुए मैंने दस प्रधानमंत्रियों पर कार्टून बनाए हैं.
आम तौर पर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, माधवराव सिंधिया और टीएन सेशन जैसे बड़े लोग और नेता इनकी तारीफ करते रहे हैं और कार्टून की मूल प्रतियों की मांग करते रहे हैं.
मुझे याद है जब बीजेपी नेता और भारत के पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह पाकिस्तान स्थित चरमपंथियों के बदले अगवा किए गए जहाज़ के मुसाफिरों के साथ कंधार से वापस आए तो मैंने उन पर एक कार्टून बनाया.
इसमें जसवंत सिंह को तालिबान की वेशभूषा में दिखाया था और वे कंधे पर रॉकेट लॉंन्चर उठाकर प्रधानमंत्री वाजपेयी के कमरे में दाखिल हो रहे थे.
अगले दिन मुझे जसवंत सिंह का फोन आया और उन्होंने मुझसे उस कार्टून की मूल प्रति मांगी. उन्होंने कहा कि वे तालिबानी पहनावे में बड़े अच्छे लग रहे हैं और उस कार्टून को फ्रेम करवा कर अपने कमरे में लगाना चाहते हैं.
अभी आपने देखा होगा कि राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब मुखर्जी इंटरव्यू दे रहे थे तो उन्होंने अपने पीछे दीवार पर आरके लक्षमण के दो कार्टून लगा रखे हैं जो प्रणब मुखर्जी पर थे.
"मुझे लगता है कि राजनीति में पिछले सालों में जैसे लोग आ गए हैं उनके स्तर में गिरावट आई है. वो कार्टून को समझ नहीं पाते और गलत मतलब निकालते हैं."
मुझे लगता है कि राजनीति में पिछले सालों में जैसे लोग आ गए हैं उनके स्तर में गिरावट आई है. वो कार्टून को समझ नहीं पाते और गलत मतलब निकालते हैं.
असीम के खिलाफ जिस तरह से कार्टून के आधार पर कार्रवाई की गई है वह निहायत ही शर्मनाक है और लोकतंत्र पर धब्बा है.
क्यों हैं असहनशील
जो असुरक्षित और कमज़ोर सरकारें होती हैं वो असहनशील भी होती हैं. क्योंकि हर विरोध में उन्हें लगता है कि यह हमारे प्रति विरोध है और जो सरकार के विरुद्ध होता है वो उन्हें देशद्रोह लगता है.
उसे ऐसे ही साबित करने के लिए वे कानून को तोड-मरोड़ कर अपने फायदे के लिए पेश करते हैं.
चाहे वो अन्ना हज़ारे का आंदोलन हो या रामदेव और अरविंद केजरीवाल हों, अगर कोई उनके खिलाफ कुछ कहे तो वो देशद्रोह है. अगर संसद के अंदर मुक्का घूसेबाज़ी पर उतर आए तो वो देशद्रोह नहीं है.
सीमा नहीं लांघी
यह कहना कि असीम ने अपनी सीमा लांघी गलत होगा. भारत में कार्टूनिंग सबसे कम भड़काने वाले होते हैं.
आप जा कर अमरीका, ब्रिटेन में देखिए यहां जर्मनी में देखिए जहां मैं इस वक्त बैठा हूँ. इन देशों में अपने नेताओं को नग्न दिखाया जाता है.
सीमा हर जगह होती है. यह विरोध की कला है, विद्रोह की कला नहीं है.
अंग्रेजों ने भी कभी किसी कार्टूनिस्ट को कार्टून बनाने के आधार पर गिरफ्तार नहीं किया.
65 साल के लोकतंत्र में आत्मविश्वास होना चाहिए. जिस देश में लोकतंत्र है वहां कार्टूनिंग कला फली फूली है. जिस दिन यह कला मर जाएगी लोकतंत्र भी ज्यादा दिन नहीं चलने वाला.
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अनीस त्रिवेदी - कोई कार्टूनिस्ट नहीं हैं और न ही आर्टिस्ट, जैसे कुमार विश्वाश भाँटगिरी करके मंचीय वाहवाही बटोरने के लिए जो भी मन में आता है 'बकता' रहता है. अरविन्द केजरीवाल ने ऐसे ही लोगों का गिरोह बनाकर उनको इकट्ठा किया था. जिसमें ऐसे ही
लोग थे इनपर सब पर
"देशद्रोह ही नहीं" मानवता के द्रोह का भी मुक़दमा चलाया जाना चाहिए !
१.अशोक की लाट कोई सोनिया या मनमोहन के युग की देन नहीं है, यह सांस्कृतिक धरोहर है जिसे सम्राट अशोक की कलात्मकता का बोध कराती है. इनकी घटिया सोच उन कलाकारों का अपमान करती है.
२.कुमार विश्वास श्री लालू प्रसाद "यादव" के नाम पर सारे यादवों को गाली देता है जो सामाजिक अपमान है.
मिडिया का प्रबंधन करके कहीं इन्हें " अनीस त्रिवेदी" को प्रायोजित तो नहीं किया जा रहा है कार्टूनिस्ट और आर्टिस्ट के रूप में .
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असीम की गिरफ्तारी पर बवाल, रिहाई की मांग
सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 18:54 IST तक के समाचार
असीम त्रिवेदी को रविवार को 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया
कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर उठे बवाल के बीच भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे संगठन इंडिया अगेंस्ट करप्शन यानी आईएसी ने मांग की है कि उन्हें तुरंत रिहा किया जाए क्योंकि उनके खिलाफ लगाए गाए आरोप निराधार हैं.
संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुंबई में उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है.
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भारतीय संविधान को नीचा दिखाने और अपनी वेबसाइट पर 'देशद्रोही' सामग्री छापने के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी की भारत के विभिन्न हिस्सों में, सोशल और अन्य मीडिया पर जबरदस्त आलोचना हो रही है.
आईएसी के अरविंद केजरीवाल ने कहा, ''देशद्रोह के आरोप तब लगते हैं जब कोई देश के खिलाफ युद्ध छेड़ता है. असीम त्रिवेदी के कार्टूनों बनाने पर इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते.''
'पुलिस हिरासत नहीं'
वकील वाईपी सिंह
"जहां तक मैंने सुना है आप अधिक से अधिक राष्ट्रीय सम्मान को अपमान से बचाने के कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं न कि देशद्रोह के आरोपों के तहत जिसमें अधिक सज़ा का प्रावधान है."
इस बीच असीम की गिरफ्तारी पर मचे बवाल के बाद पुलिस ने माना कि उनकी पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं थी. पुलिस ने अपना रुख बदला और असीम को अब 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने तो साफ कह दिया कि उनके पुलिस रिमांड की कोई जरूरत नहीं थी.
उन्होंने कहा, ''पुलिस की जांच पूरी हो चुकी थी. पुलिस हिरासत की मांग करने की कोई जरूरत नहीं थी. मैं मामले की जांच कर रहा हूँ. हम यह बात अदालत में कहेंगे.''
केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने कहा था, ''कुछ कार्यकर्ता हमसे मिले और उन्होंने हमें असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी की जानकारी दी. हम वहां सरकार से बात करेंगे. अगर मदद करने लायक होगा तो मदद की जाएगी.''
'अघोषित आपातकाल'
जाने माने कार्टूनिस्ट सुधीर तेलंग ने बीबीसी से बात करते हुए सरकार और नेताओं को आडे हाथों लिया. उन्होंने कहा, ''संसद के अंदर तो इनका 'सेंस ऑफ ह्युमर' खत्म हो चुका है. संसद के बाहर भी इन्हें यह मंज़ूर नहीं है. साल 1975 में घोषित रूप से आपातकाल था. तब एक सेंसर बोर्ड होता था जो खबरों और कार्टूनों को सेंसर करता था.''
मार्कण्डेय काटजू ने भी असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का विरोध किया है
उन्होंने कहा, ''अब सेंसरशिप और आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है. लेकिन यह अघोषित आपातकाल है जो और भी दुखद है, और भी खतरनाक है.''
वरिष्ठ पत्रकार और टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन के संपादक राजदीप सरदेसाई ने कहा है, ''मैं इसे बहुत खतरनाक मानता हूँ कि आप इस देश में नफरत भड़काने वाले भाषण से तो बच सकते हैं लेकिन राजनीतिक व्यंग्य के बाद आप तुरंत गिरफ्तार किए जाते हैं.''
'गलत कानून के तहत'
एक पूर्व पुलिस अधिकारी और वकील वाईपी सिंह ने मिंट समाचार पत्र को बताया, ''जहां तक मैंने सुना है आप अधिक से अधिक राष्ट्रीय सम्मान को अपमान से बचाने के कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं न कि देशद्रोह के आरोपों के तहत जिसमें अधिक सज़ा का प्रावधान है.''
असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि असीम त्रिवेदी ने कोई ग़लत काम नहीं किया है.
जस्टिस काटजू ने कहा, ''मेरे विचार से कार्टूनिस्ट ने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत-सी बातें कही जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी ग़लत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ़्तार करना भी एक अपराध है.''
सोशल नेटवर्किंग साइटों पर असीम की गिरफ्तारी का जबरदस्त विरोध हो रहा है और लोग उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं.
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असीम त्रिवेदी: कार्टून बनाने पर क्यों पहुंचे जेल?
सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 00:07 IST तक के समाचार
भारतीय संविधान को नीचा दिखाने और अपनी वेबसाइट पर 'देशद्रोही' सामग्री छापने के आरोप में कानपुर के रहने वाले कार्टूनिस्ट क्लिक करेंअसीम त्रिवेदी
को 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
"यदि सच बोलना देशद्रोह हैं तो मैं देशद्रोही हूं. महात्मा गांधी को भी देशद्रोही कहा गया था और देश की सेवा करने के लिए मेरे खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाता है तो मैं ऐसा करना जारी रखूंगा."
असीम त्रिवेदी
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असीम त्रिवेदी लंबे समय से राजनीतिक विषयों पर कार्टून बनाते हैं और इंटरनेट पर सेंसरशिप के खिलाफ़ भी सक्रिय रहे हैं. दुनियाभर में इंटरनेट की सेंसरशिप के खिलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों के समर्थन में वो और उनके साथी भारत में भी प्रदर्शन करते रहे हैं. इस साल मार्च महीने में उन्होंने और उनके साथियों ने पहली अप्रैल यानि 'फूल्स डे' को दूर संचार मंत्री कपिल सिब्बल को समर्पित करने की मुहिम छेड़ी थी. उनका मानना है कि इंटरनेट जैसे विस्तृत माध्यम पर सेंसरशिप लागू करने की बात मूर्खता का प्रतीक है.
राजद्रोह के मामले को लेकर उनके खिलाफ़ दायर एफ़आईआर के आधार पर शनिवार को उन्हें गिरफ्तार किया गया था. लेकिन मुंबई स्थित बांद्रा की एक अदालत ने अब उन्हें 16 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
'संविधान का मज़ाक'
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पुलिस ने वेबसाइट पर डाली गई सामग्रियों और अन्य आरोपों के बारे में पूछताछ के लिए त्रिवेदी की हिरासत की मांग की थी.
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सदस्य अमित कतरनयी ने त्रिवेदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने पिछले साल अन्ना हजारे की रैली के दौरान बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ऐसे पर्चे लगाए थे जिसमें भारतीय संविधान का मज़ाक उड़ाया जा रहा था. त्रिवेदी के खिलाफ यह आरोप भी लगाया गया था कि उन्होंने अपनी वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री डाली है.
असीम राजनीतिक विषयों पर कार्टून बनाते हैं और इंटरनेट पर सेंसरशिप के खिलाफ़ सक्रिय रहे हैं.
अदालत ने पिछले महीने त्रिवेदी के खिलाफ एक गैर-जमानती वारंट जारी किया था. अदालत के बाहर संवाददाताओं की मौजूदगी में त्रिवेदी ने कहा कि यदि सच बोलना देशद्रोह हैं तो मैं देशद्रोही हूं. महात्मा गांधी को भी देशद्रोही कहा गया था और देश की सेवा करने के लिए मेरे खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाता है तो मैं ऐसा करना जारी रखूंगा.
'भ्रष्टाचार पर प्रहार'
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि त्रिवेदी ने भारतीय ध्वज का भी अपमान किया है और उन्हें आईपीसी की धारा 124 ए के तहत देशद्रोह के अलावा विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किया गया है.
गौरतलब है कि त्रिवेदी को कार्टूनिस्ट बनाने की कला से जुड़ा एक अवॉर्ड हासिल करने के लिए बुधवार को सीरिया के लिए रवाना होना था.
इस बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कई सदस्य असीम त्रिवेदी के बचाव में सामने आए हैं उनका कहना है कि यदि कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ बात करता है तो उसे राष्ट्रविरोधी क़रार देकर उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है.
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