भारतीय कलाएं आम आदमी की खुशियाँ थीं, धीरे धीरे आम आदमी की पकड़ से ये दूर होती गयीं और अब खास लोगों की ये कृपा की पात्र होती जा रही हैं . तो क्या लगता है की यही स्थिति बनी रहेगी, जैसा चल रहा है उससे तो यही लगता है की आने वाले दिनों में इसकी दशा और ख़राब होगी।
राज्य और आम लोगों के बीच बढती खाइयाँ इन कलाओं के निर्माण से हटती और कटती जा रही हैं, जब तक इनका संरक्षण नहीं होगा यह समाप्त हो जायेंगी .
![]() |
| तारक दा की कृति के साथ नेहा अग्रवाल |
