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आधे दलित का दुःख
कहानी संग्रह से निम्न कहानी ले रहे हैं (साभार) जिस कहानी का नाम है
उच्छिष्ट
आधे दलित का दुःख
उच्छिष्ट
जिसके लेखक हैं श्री उमराव सिंह जाटव
जो चित्रकला के विद्यार्थी रहें हैं और अपने अनुभव को उन्होंने इस कहानी के माध्यम से कहा है यद्यपि कहानी के सारे पात्रों का नाम काल्पनिक है !
(मैं उन जातिवादी, महाभ्रष्ट और दुराचारी शिक्षकों को यह कहानी समर्पित करता हूँ जिससे आने वाली पीढियां इससे सबक लेकर अपना जीवन वर्बाद न होने दें)
(मैं उन जातिवादी, महाभ्रष्ट और दुराचारी शिक्षकों को यह कहानी समर्पित करता हूँ जिससे आने वाली पीढियां इससे सबक लेकर अपना जीवन वर्बाद न होने दें)
वैसे तो जाटव साहब सेना के बड़े अधिकारी रहे हैं लेकिन वे
चित्रकला विभाग के विद्यार्थी भी रहे हैं जिसमें अपने समय के कला विभाग के बारे में जो उनका उल्लेख है उसे पढ़कर ही देखें ;










































