मेरी फितरत और तमन्ना थी कि हम वो करे जो आज तक नहीं हुआ !
ये कहाँ मंजूर था उनको जो फितरत में रात दिन उल्टा ही करता था !
जिन्हे मैं ये समझाने में ही ग़ाफ़िल था वो उन्हें भरमाने में काबिल था !
उसे हर चीज में ही महारत है इस बात का भी उन्हें एहसास ही तो था !
भला करना उसे आता भी नहीं तो है लुटेरों की बरात में
मैं कैसे कह दूँ ये की वो भरमाँ दिया होगा मेरा साहस मेरी हिम्मत भी तो है !
ये कहाँ मंजूर था उनको जो फितरत में रात दिन उल्टा ही करता था !
जिन्हे मैं ये समझाने में ही ग़ाफ़िल था वो उन्हें भरमाने में काबिल था !
उसे हर चीज में ही महारत है इस बात का भी उन्हें एहसास ही तो था !
भला करना उसे आता भी नहीं तो है लुटेरों की बरात में
मैं कैसे कह दूँ ये की वो भरमाँ दिया होगा मेरा साहस मेरी हिम्मत भी तो है !
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