शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

क्योंकि इनके आका बैठे हैं


डॉ.लाल रत्नाकर 
उनके मन में क्या पल रहा है 
मुझे क्या पता, पर अपना मन 
तो साफ है इतना तो पता है 
वो रोज़ रोज़ तिकड़मों के फेरे 
डालते रहते हैं .
शायद भोला समझ कर 
क्योंकि कई चीजें वो पाले हैं 
अपने अपराधी मन में 
जिसके जवाब उनकि की भाषा में 
भेष में देना वैसा ही अपराधी होना है 
पर इनकी सजा उन मुल्कों के मुताबिक 
है जहाँ सरे आम ऐसे अपराधियों को 
क़त्ल कर दिया जाता है 
हो सकता है यह व्यवस्था कहने कों 
मानवीय न लगती हो पर दरअसल 
ये बगैर इसके सुधर नहीं सकते 
क्योंकि इनके आका बैठे हैं 
हर उस जगह जहाँ से ये अपराध करते हैं
और वे इनकी रक्षा करते हैं हजारों वर्षों से 
इसीलिए इन्हें फला साहब कहके 
संबोधित  किया जाता है .
असल में ये साहब क्या ?
मानवीयता के पैमाने पर अपराधी अत्याचारी हैं 
जन्मना ये इसके हक़दार बने हुए हैं 
दर असल इन्हें ठीक करना होगा 
बिगड़े हुए गधे की तरह पीट पीट कर 
तब तो इनकी सारी दादागिरी ठीक होगी 
गधे की तरह दरअसल यही भय
उनके मन में पल रहा है  .

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